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DRDO का बड़ा ऐलान, 1500 किमी मारक हाइपरसोनिक मिसाइल से बदलेगा युद्ध संतुलन

Satyakhabarindia

DRDO का ऐलान: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस सुदर्शन चक्र की कल्पना की है उसका मकसद देश को ऐसा सुरक्षा कवच देना है जिसे कोई दुश्मन भेद न सके। इसी सोच के साथ भारत आत्मनिर्भरता की राह पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन पूरी मुस्तैदी के साथ एक के बाद एक बड़े और निर्णायक प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। मिसाइल फ़ोर्स और रॉकेट फ़ोर्स को मज़बूत करने की दिशा में सुदर्शन चक्र एक केंद्रीय ढांचा बनकर उभर रहा है। इसमें ज़मीन से हवा तक और समुद्र से आसमान तक हर स्तर पर सुरक्षा और आक्रामक क्षमता को जोड़ा जा रहा है। आने वाले समय में यही सुदर्शन चक्र भारत की सामरिक ताकत की पहचान बनेगा और दुश्मन को पहले ही कदम पर रोकने का संदेश देगा।

हाइपरसोनिक ताकत और प्रलय की मारक क्षमता

इस सुदर्शन चक्र का सबसे अहम हिस्सा है भारत की लॉन्ग रेंज एंटी शिप हाइपरसोनिक मिसाइल। यह मिसाइल हाइपरसोनिक गति से उड़ान भरती है और 1500 किलोमीटर दूर तक दुश्मन के जहाजों को पूरी तरह तबाह करने की क्षमता रखती है। यह स्थिर और गतिमान दोनों तरह के लक्ष्यों को भेद सकती है और रडार को चकमा देने में माहिर है। हैदराबाद की प्रयोगशालाओं में तैयार हो रही इस मिसाइल की पहली झलक कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड में देश देखेगा। इसके साथ ही प्रलय मिसाइल भी भारत की मारक शक्ति का अहम हथियार है। 150 से 500 किलोमीटर की रेंज वाली यह मिसाइल उड़ान के दौरान अपना रास्ता बदल सकती है। इससे दुश्मन के रडार और इंटरसेप्टर सिस्टम पूरी तरह नाकाम हो जाते हैं। एयर स्ट्रिप से लेकर कमांड सेंटर तक सब कुछ पल भर में निशाना बनाया जा सकता है।

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आकाश नेक्स्ट जेनरेशन और अस्त्र की आसमानी ढाल

आकाश नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल ने पहले ही अपनी उपयोगिता साबित कर दी है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस सिस्टम ने दुश्मन की ओर से आने वाले हर एरियल थ्रेट को हवा में ही खत्म किया। अब आकाश प्राइम और आकाश एनजी को एक गेम चेंजर के रूप में देखा जा रहा है। यह सिस्टम एक साथ सौ से अधिक लक्ष्यों पर नज़र रख सकता है और कई टारगेट को एक समय पर ध्वस्त कर सकता है। वहीं हवा से हवा में मार करने वाली अस्त्र मिसाइल भी भारतीय वायुसेना की रीढ़ बन रही है। सुखोई तीस और तेजस जैसे आधुनिक लड़ाकू विमानों के साथ इंटीग्रेटेड अस्त्र और अस्त्र दो मिसाइलें दुश्मन के विमानों को दूर से ही ढेर करने में सक्षम हैं। यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक का प्रमाण है और भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को दर्शाती है।

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कर्तव्य पथ पर शक्ति प्रदर्शन और दुनिया को संदेश

गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर इन स्वदेशी मिसाइलों की झांकी सिर्फ एक परेड नहीं होगी बल्कि दुनिया के लिए एक साफ संदेश होगी। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के एयरबेस पर हुई सटीक कार्रवाई ने पहले ही कई देशों को चौंका दिया था। अब DRDO की मिसाइलों का सार्वजनिक प्रदर्शन यह दिखाएगा कि भारत सिर्फ जवाब देना ही नहीं बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए भी पूरी तरह तैयार है। सुदर्शन चक्र के माध्यम से रडार सिस्टम और मिसाइल फ़ोर्स को जोड़कर एक अभेद्य सुरक्षा ढांचा बनाया जा रहा है। इसका लक्ष्य बिल्कुल साफ है। देश को इतना मजबूत बनाना कि कोई भी दुश्मन आंख उठाकर देखने की हिम्मत न कर सके। यह भारत की नई रक्षा सोच है जो आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता पर टिकी हुई है।

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